Dusra Kalma Shahadat in Hindi

इस्लाम में छह कलमे (6 Kalimas) को अत्यंत महत्व दिया गया है। इनमें से दूसरा कलमा शहादत (Kalma Shahadat) ईमान और तौहीद का ऐलान है। यह कलमा हर मुसलमान के ईमान का आधार है, जो अल्लाह की एकता और हज़रत मुहम्मद ﷺ को आखिरी रसूल मानने की गवाही देता है। इस लेख में हम दूसरा कलमा शहादत को अरबी, हिंदी, हिंदी अनुवाद, रोमन इंग्लिश और इंग्लिश ट्रांसलेशन में विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे इसका वज़ीफ़ा, फायदे और संबंधित हदीस।

Dusra Kalma Shahadat in Hindi

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا ٱللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अशहदु अल्ला इलााहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू
(मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और मैं गवाही देता हूँ कि हज़रत मुहम्मद ﷺ अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं।)

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا ٱللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

अशहदु अल्ला इलााहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू

मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और मैं गवाही देता हूँ कि हज़रत मुहम्मद ﷺ अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं।

Ashhadu Alla Ilaha Illallahu Wa Ashhadu Anna Muhammadan Abduhu Wa Rasuluhu

  1. रोज़ाना 100 बार सच्चे दिल से इस कलमे को पढ़ने से ईमान मज़बूत होता है।
  2. तौबा और ईमान की ताज़गी के लिए इसे सुबह-शाम पढ़ना बेहद लाभदायक है।
  3. किसी भी नयी शुरुआत या बुराई से तौबा के लिए इसका वज़ीफ़ा करें।
  1. ईमान को मज़बूत करता है।
  2. तौहीद (अल्लाह की एकता) को दिल में बिठाता है।
  3. कुफ़्र से दूर करता है और इस्लामी पहचान मजबूत करता है।
  4. क़ब्र और क़यामत के सवालों में मददगार बनता है।
  5. दिल को सुकून और रूहानी ताजगी देता है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जो इंसान आखिरी वक्त में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ कहता है, वह जन्नत में दाखिल होगा।”
– [सहीह बुखारी: 6479]

“जिसने दिल से ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ कहा, वह जन्नत में दाखिल होगा।”
– [सहीह मुस्लिम: 26]

इमाम नववी रह. फरमाते हैं:
“कलमा शहादत वह दरवाज़ा है जिससे बंदा इस्लाम में दाखिल होता है और इसी पर उसकी नजात (मोक्ष) आधारित होती है।”

दूसरा कलमा शहादत इस्लाम की बुनियाद है। इसे समझना, याद करना और उस पर अमल करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। इसकी तिलावत से दिल को सुकून और ईमान को मज़बूती मिलती है। रोज़ाना इसका वज़ीफ़ा करके हम अपनी रूहानी ज़िन्दगी को बेहतर बना सकते हैं।

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