इस्लाम में इबादत का सबसे अहम तरीका है सलाह (नमाज़)। यह वह कार्य है जो हर मुसलमान दिन में पाँच बार करता है, अल्लाह से सीधा रिश्ता जोड़ने के लिए। क़ुरआन और हदीस में नमाज़ की अहमियत बार-बार बताई गई है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"इस्लाम की नींव पाँच बातों पर है… नमाज़ क़ायम करना…" (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)

नमाज़ की फ़र्ज़ियत (क़ुरआनी और हदीसी सबूत)
🕋 क़ुरआन से सबूत
وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَارْكَعُوا مَعَ الرَّاكِعِينَ
“और नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो और रुकू करने वालों के साथ रुकू करो।”
(सूरह अल–बक़रह 2:43)
ﷺ हदीस से सबूत
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“इस्लाम पाँच चीज़ों पर क़ायम है: ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह की गवाही, नमाज़ क़ायम करना, ज़कात देना, रमज़ान के रोज़े रखना और हज करना।”
(बुख़ारी और मुस्लिम)
नमाज़ के पाँच समय
- फ़ज्र (सुबह की नमाज़) – सुबह सवेरे सूरज निकलने से पहले।
- ज़ुहर (दोपहर की नमाज़) – दोपहर के वक्त।
- असर (शाम से पहले की नमाज़) – देर दोपहर।
- मग़रिब (सूरज ढलने के बाद) – सूर्यास्त के तुरंत बाद।
- ईशा (रात की नमाज़) – रात में सोने से पहले।
नमाज़ के फायदे
1. रूहानी (Spiritual Benefits)
- अल्लाह के करीब लाती है।
- गुनाहों से बचाती है।
- दिल को सुकून और इत्मिनान देती है।
2. जिस्मानी (Physical Benefits)
- वुज़ू से ताज़गी और सफ़ाई मिलती है।
- हरकतों से शरीर में लचीलापन और तंदुरुस्ती।
3. अख़लाक़ी (Moral Benefits)
- अनुशासन और समय की पाबंदी की आदत डालती है।
- समाज में आपसी भाईचारा बढ़ाती है।
नमाज़ का तरीका (संक्षिप्त)
- नियत (Intention) – दिल में यह ठानना कि आप कौन सी नमाज़ पढ़ रहे हैं।
- तकबीर-ए-तहरीमा – “Allahu Akbar” कहकर हाथ उठाना।
- क़िरात – सूरह अल-फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ना।
- रुकू – झुककर “Subhana Rabbiyal Adheem” कहना।
- सज्दा – माथा ज़मीन पर रखकर “Subhana Rabbiyal A’la” कहना।
- तशह्हुद – बैठकर कलिमा पढ़ना।
- सलाम फेरना – दाएँ और बाएँ “Assalamu Alaikum wa Rahmatullah” कहना।
जुम्मा, ईद और नफ़्ल नमाज़ें
- जुम्मा की नमाज़ – हफ़्ते में एक बार, फ़र्ज़ नमाज़।
- ईद की नमाज़ें – साल में दो बार, खुशी के मौके पर।
- नफ़्ल नमाज़ें – फ़र्ज़ के अलावा अल्लाह की रज़ा के लिए पढ़ी जाने वाली।
नमाज़ छोड़ने की सज़ा
- क़ुरआन और हदीस के मुताबिक, जानबूझकर नमाज़ छोड़ना बड़ा गुनाह है।
- रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“हमारे और कुफ़्र के बीच फ़र्क़ नमाज़ है।” (तिर्मिज़ी)
“सलाह (नमाज़) – इस्लाम का दूसरा स्तंभ, इसके समय, फायदे, तरीका और महत्व को इस्लामिक हिंदी में विस्तार से जानें। क़ुरआन–हदीस से सबूत और नमाज़ की अहमियत पढ़ें।”