Surah Al-Falaq in Arabic, Hindi, Roman English

सूरह अल-फलक (سورة الفلق) क़ुरआन पाक की 113वीं सूरह है, जो मक्का मुअज़्ज़मा में नाज़िल हुई। यह सूरह बुराई, जादू, हसरत और शैतानी असर से बचने के लिए अल्लाह की पनाह मांगने का बेहतरीन ज़रिया है। इसे सूरह अल-नास के साथ पढ़ना नबी ﷺ की सुन्नत है और इसे “मुअव्विज़तैन” (दो पनाह देने वाली सूरहें) कहा जाता है। Surah Al-Falaq in Arabic, Hindi, Roman English

Surah Al-Falaq in Arabic, Hindi, Roman English

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, रहमत वाला है।

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ
क़ुल अऊज़ु बि रब्बिल-फ़लक़
कहो (हे नबी ﷺ): मैं सुबह के रब की पनाह मांगता हूँ,

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
मिन शर्री मा ख़लक़
उसकी हर मख़लूक़ की बुराई से जो उसने पैदा की,

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
वा मिन शर्री ग़ासिकिन इज़ा वक़ब
और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए,

وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ
वा मिन शर्रिन्न-नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़द
और जादूगरनियों की बुराई से जो गाठों में फूंकती हैं,

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
वा मिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद
और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ

बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम
क़ुल अऊज़ु बि रब्बिल-फ़लक़
मिन शर्री मा ख़लक़
वा मिन शर्री ग़ासिकिन इज़ा वक़ब
वा मिन शर्रिन्न-नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़द
वा मिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, रहमत वाला है।
कहो (हे नबी ﷺ): मैं सुबह के रब की पनाह मांगता हूँ,
उसकी हर मख़लूक़ की बुराई से जो उसने पैदा की,
और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए,
और जादूगरनियों की बुराई से जो गाठों में फूंकती हैं,
और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।

Bismillahir Rahmanir Rahim
Qul A‘Uzu Bi Rabbil-falaq
Min Sharri Ma Khalaq
Wa Min Sharri Ghasiqin Iza Waqab
Wa Min Sharrin-naffaa-saati Fil ‘Uqad
Wa Min Sharri Haasidin Iza Hasad

In the name of Allah, the Most Gracious, the Most Merciful.
Say, “I seek refuge with the Lord of daybreak,
From the evil of what He has created,
And from the evil of the darkness when it settles,
And from the evil of those who blow on knots (practicing witchcraft),
And from the evil of an envier when he envies.”

सूरह अल-फलक हमें यह सिखाती है कि इंसान को हर उस बुराई से अल्लाह की पनाह मांगनी चाहिए जो हमारे ईमान, जिस्म और ज़िन्दगी को नुक़सान पहुंचा सकती है।

  • “रब्बिल-फ़लक़” – अल्लाह तआला को सुबह का पैदा करने वाला कहा गया है, क्योंकि सुबह अंधेरे को खत्म कर देती है, जैसे अल्लाह बुराई को खत्म कर देता है।
  • “मा ख़लक़” – हर मख़लूक़ में अच्छाई भी है और बुराई भी हो सकती है, इसलिए अल्लाह से उसकी बुराई से पनाह मांगी जाती है।
  • “ग़ासिकिन इज़ा वक़ब” – रात का अंधेरा अक्सर डर और खतरे का वक्त होता है, इसी से पनाह मांगी गई।
  • “नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़द” – यह जादूगर और जादूगरनियों की ओर इशारा है जो गाठों में फूंक कर जादू करते हैं।
  • “हासिद” – हसद करने वाला इंसान दिल की बुराई से दूसरों को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश करता है।
  • हदीस में आता है कि रसूलुल्लाह ﷺ सुबह-शाम सूरह अल-फलक और सूरह अल-नास तीन-तीन बार पढ़ते थे (अबू दाऊद: 5082)
  • यह सूरह जादू, बुरी नज़र और हसद से हिफ़ाज़त करती है।
  • नींद से पहले इसे पढ़ना अल्लाह की हिफ़ाज़त में रात गुज़ारने का ज़रिया है।
  • सुबह और शाम की दुआओं में पढ़ें।
  • बच्चों पर फूंककर हिफ़ाज़त के लिए पढ़ें।
  • सफ़र, बीमारी या डर की हालत में पढ़ें।

सूरह अल-फलक हमें यह सिखाती है कि हर बुराई से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका अल्लाह की पनाह में आना है। इसे अपनी रोज़ाना की दुआओं में शामिल करें और दूसरों को भी इसकी अहमियत बताएं।

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