सूरतुल इख़लास (الإخلاص) कुरान की 112वीं सूरह है, जिसमें अल्लाह तआला की तौहीद (एक होने) की पूर्ण व्याख्या की गई है। यह सूरह छोटी होने के बावजूद इस्लाम के अक़ीदे का सार है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि “यह सूरह कुरान के एक-तिहाई के बराबर है”। इसे पढ़ने से इंसान के दिल में अल्लाह की महानता और शुद्ध ईमान पैदा होता है।

Surah Al-Ikhlas
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्ला–हिर्रहमा–निर्रहीम
(अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, रहमत वाला है।)
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
कुल हुवल लाहू अहद
(कह दो: वह अल्लाह एक है।)
اللَّهُ الصَّمَدُ
अल्लाहुस समद
(अल्लाह बेनियाज़ है।)
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
लम यलिद वलम यूलद
(वो न किसी का बाप है न किसी का बेटा)
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
वलम यकूल लहू कुफुवन अहद
(और न कोई उस के बराबर है।)
Surah Al-Ikhlas In Arabic
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
اللَّهُ الصَّمَدُ
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
Surah Al-Ikhlas In Hindi
बिस्मिल्ला–हिर्रहमा–निर्रहीम
कुल हुवल लाहू अहद
अल्लाहुस समद
लम यलिद वलम यूलद
वलम यकूल लहू कुफुवन अहद
Surah Al-Ikhlas Ka Tarjuma In Hindi
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, रहमत वाला है।
कह दो: वह अल्लाह एक है।
अल्लाह बेनियाज़ है।
वो न किसी का बाप है न किसी का बेटा
और न कोई उस के बराबर है।
Surah Al-Ikhlas in Roman English
Bismillāhir-raḥMānir-raḥĪm
Qul Huwa Allāhu AḥAd
Allāhu ṣ-ṣAmad
Lam Yalid Wa Lam Yūlad
Wa Lam Yakun Lahu Kufuwan AḥAd
Surah Al-Ikhlas Tafsir
- Qul huwa Allahu ahad – अल्लाह एक है, उसका कोई साझीदार नहीं।
- Allahu-s-samad – वह बेनियाज़ है, सब उसी पर निर्भर हैं।
- Lam yalid wa lam yūlad – वह न किसी को जन्म देता है और न जन्मा गया है, यानी वह इंसानी या मख़लूक़ी गुणों से पाक है।
- Wa lam yakun lahu kufuwan ahad – उसका कोई मुकाबला या बराबरी करने वाला नहीं।
Surah Al-Ikhlas Benefits
- इसे सोने से पहले पढ़ना सुन्नत है।
- हर नमाज़ के बाद 3 बार पढ़ना बरकत लाता है।
- यह सूरह कुरान के एक-तिहाई के बराबर है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया,
"जो व्यक्ति दिन में 3 बार सूरह इख़लास पढ़े, उसके लिए जन्नत वाजिब हो जाएगी।" (तिर्मिज़ी)
सूरतुल इख़लास इस्लाम की तौहीद का पैग़ाम देती है। इसे दिल से समझकर और ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ने से ईमान मजबूत होता है और अल्लाह की रहमत हासिल होती है।