Taraweeh Ki Dua in Hindi

रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और अल्लाह की रहमतों से भरपूर होता है। इस महीने की एक खास और बरकत वाली इबादत है तारावीह की नमाज़, जो इशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है। इसमें कुरआन पाक की तिलावत होती है और मुसलमान पूरी तवज्जो से अल्लाह की इबादत करते हैं।
तारावीह के दौरान एक खास दुआ पढ़ी जाती है जो अल्लाह की तस्बीह, उसकी अज़मत का इकरार और जहन्नम से पनाह मांगने का ज़रिया है। इस ब्लॉग में हम आपको तारावीह की दुआ – Taraweeh Ki Dua in Hindi, Arabic, Roman, English Translation में बताएंगे।

Taraweeh Ki Dua in Hindi, Arabic, English Translation

سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ،
سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ،
سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ،
سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ،
اللَّهُمَّ أَجِرْنَا مِنَ النَّارِ، يَا مُجِيرُ، يَا مُجِيرُ، يَا مُجِيرُ.

सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत,
सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत,
सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू,
सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह,
अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि, या मुजीरू, या मुजीरू, या मुजीर।

पाक है वह ज़ात जो सारी बादशाहत और सल्तनत का मालिक है,
पाक है वह ज़ात जो इज़्ज़त, महानता, हैबत, ताक़त, बड़ाई और जबरूत वाला है,
पाक है वह ज़िंदा बादशाह जो न सोता है और न मरता है,
बहुत पाक और बहुत पवित्र है हमारा रब, फ़रिश्तों और रूह का रब,
ऐ अल्लाह! हमें जहन्नम की आग से बचा ले, ऐ बचाने वाले! ऐ बचाने वाले! ऐ बचाने वाले!

Subhana Zil-mulki Wal-malakoot,
Subhana Zil-izzati Wal-‘Azomati Wal-haibati Wal-qudrati Wal-kibriyaai Wal-jabaroot,
Subhanal-maliki Al-hayyilladhi La Yanamu Wa La Yamoot,
Subbuhun Quddusun Rabbuna Wa Rabbul-malaikati War-rooh,
Allahumma Ajirna Minan-naar, Ya Mujiro, Ya Mujiro, Ya Mujiro.

Glory be to the Owner of Sovereignty and Dominion,
Glory be to the Possessor of Honour, Majesty, Awe, Power, Greatness, and Might,
Glory be to the Ever-Living King Who neither sleeps nor dies,
Most Holy, Most Pure is our Lord, the Lord of the Angels and the Spirit,
O Allah! Save us from the Fire, O Protector! O Protector! O Protector!

  1. अल्लाह की बड़ाई का इकरार
    • इस दुआ की शुरुआत अल्लाह तआला की बादशाहत, कुदरत और अज़मत की तस्बीह से होती है। इसे पढ़ने से तक़्वा (अल्लाह का डर) पैदा होता है और दिल में अल्लाह की शान और बढ़ जाती है।
  2. ईमान की मजबूती
    • अल्लाह की बार-बार हम्द व सना और उसकी सिफ़ात का ज़िक्र करने से मोमिन का दिल अपने रब से और करीब हो जाता है, जिससे ईमान पुख़्ता और इबादत में सच्चाई आती है।
  3. जहन्नम से हिफ़ाज़त की दुआ
    • इस दुआ के आख़िर में जहन्नम की आग से बचने की गुज़ारिश है, जो हमें आख़िरत की याद दिलाती है और नेक ज़िंदगी गुज़ारने की तरगीब देती है।
  4. रूहानी पाकीज़गी
    • तारावीह की लंबी तिलावत के बाद यह दुआ पढ़ने से दिल गुनाहों, घमंड और ग़फ़लत से पाक होता है।
  5. अल्लाह की रहमत का हासिल होना
    • इस दुआ में बार-बार “या मुजीर” (ऐ बचाने वाले) पुकारा जाता है, जो अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत हासिल करने का सबब बनता है।
  6. सुन्नत से जुड़ाव
    • यह दुआ रमज़ान की रातों में मुसलमानों का एक पुराना अमल है, जिसे पढ़कर हम इस्लामी विरासत और सुन्नत से जुड़ते हैं।
  7. इबादत के माहौल में इज़ाफ़ा
    • जब यह दुआ जमाअत के साथ पढ़ी जाती है तो मस्जिद का माहौल रूहानी नूर से भर जाता है और इबादत में ख़ुशू (नम्रता) पैदा होती है।

तारावीह की दुआ अल्लाह की अज़मत का इकरार और उसकी पनाह मांगने का बेहतरीन तरीका है। रमज़ान की रातों में जब आप तारावीह अदा करें, तो इस दुआ को दिल से पढ़ें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी तथा जहन्नम से पनाह मांगें।
याद रखिए, इबादत सिर्फ लफ्ज़ों से नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई और तवज्जो से क़ुबूल होती है।

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