Teesra Kalma Tamjeed In Hindi

तीसरा कलमा तंमजीद (Teesra Kalma Tamjeed in Hindi) इस्लाम के छह कलमों में से एक है, जो अल्लाह की बड़ाई, तारीफ़ और शान बयान करता है। यह कलमा ईमान को मज़बूत करने, दिल को सुकून देने और अल्लाह की रहमत हासिल करने का एक बेहतरीन ज़रिया है। इसे पढ़ने से इबादत का शौक बढ़ता है और इंसान के दिल में अल्लाह के लिए मोहब्बत और शुक्र पैदा होता है।

Teesra Kalma Tamjeed In Hindi

سُبْحَان اللهِ وَالْحَمْدُلِلّهِ وَلا إِلهَ إِلّااللّهُ وَاللّهُ أكْبَرُ وَلا حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلَّا بِاللّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيْم
सुब्हानल्लाही वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इलल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हौल वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अज़ीम
(अल्लाह पाक की पाकीज़गी बयान है, और सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, अल्लाह सबसे बड़ा है, और अल्लाह के अलावा किसी के पास ताक़त और कुव्वत नहीं, वही बुलंद और अज़ीम है।)

سُبْحَان اللهِ وَالْحَمْدُلِلّهِ وَلا إِلهَ إِلّااللّهُ وَاللّهُ أكْبَرُ وَلا حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلَّا بِاللّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيْم

सुब्हानल्लाही वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इलल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हौल वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अज़ीम

Subhanallahi Walhamdu Lillahi Wa La Ilaha Illallahu Wallahu Akbar Wa La Hawla Wa La Quwwata Illa Billahil ‘Aliyyil Azim

  1. कब पढ़ें: सुबह-शाम की अज़कार में, नमाज़ के बाद, या तस्बीह की सूरत में किसी भी वक्त।
  2. गिनती: कम से कम 100 बार रोज़ाना, या दिल की तसल्ली तक।
  3. मकसद: दिल का सुकून, ग़म का दूर होना, ईमान की मज़बूती, और अल्लाह की रहमत का हासिल होना।
  4. खास मौके: मुसीबत, परेशानी, या अल्लाह का शुक्र अदा करने के वक्त।
  1. दिल को सुकून और तसल्ली मिलती है।
  2. गुनाहों की माफ़ी और रूह की पवित्रता।
  3. शुक्र और अल्लाह की याद को बढ़ाना।
  4. परेशानियों और तकलीफ़ों से छुटकारा।
  5. बरकत और रहमत का नुज़ूल।
📜 रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“चार कलिमात ऐसे हैं जो अल्लाह को बहुत पसंद हैं: सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर।” (सहीह मुस्लिम)
📜 एक और रिवायत में है:
“ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह – यह जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना है।”
(सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)
  1. रोज़ाना सुबह और शाम कम से कम 100 बार पढ़ने की आदत डालें।
  2. तस्बीह या डिजिटल काउंटर से गिनती रखें।
  3. नमाज़ के बाद इसे अपनी दुआ में शामिल करें।
  4. बच्चों को सिखाएं और घर में सामूहिक ज़िक्र करें।

तीसरा कलमा तंमजीद सिर्फ़ ज़बान का ज़िक्र नहीं, बल्कि दिल की गवाही और अल्लाह की बड़ाई का इज़हार है। इसे पढ़ने से इंसान का ईमान ताज़ा होता है, दिल को सुकून मिलता है और अल्लाह की रहमत व बरकत हासिल होती है। यह कलमा हमें याद दिलाता है कि सारी ताक़त, इज़्ज़त और कब्र केवल अल्लाह के हाथ में है। अगर हम इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल कर लें तो हमारी रूहानी तरक़्क़ी, बरकत और सुकून में इज़ाफ़ा होगा, इंशाअल्लाह।

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